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झारखंड में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात, धान की खेती वाले 86% खेत पड़े बंजर

झारखंड(Jharkhand) में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। राज्य में 26 जुलाई तक 47 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश की वजह से किसान परेशान हैं। लेकिन राज्य के मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिन

Pooja Rai

Pooja Rai·29 Jul 2024· 3 min read

झारखंड में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात, धान की खेती वाले 86% खेत पड़े बंजर

झारखंड में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात, धान की खेती वाले 86% खेत पड़े बंजर

झारखंड(Jharkhand) में लगातार तीसरे साल सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। राज्य में 26 जुलाई तक 47 फीसदी कम बारिश हुई है। कम बारिश की वजह से किसान परेशान हैं। लेकिन राज्य के मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों अच्छी में बारिश हो सकती है और अगस्त और सितंबर में भी बारिश का अनुमान है।

धान झारखंड की प्रमुख ख़रीफ़ फसल है, लेकिन कम बारिश होने के कारण धान की बुआई काफ़ी कम हुई है। राज्य के कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार धान की खेती वाले लगभग 86 फीसदी खेत कम बारिश होने के कारण अभी भी बंजर पड़े हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कुल 24 में से चार जिलों में अभी तक धान की बुआई शुरू नहीं हुई है, जबकि बुआई का प्रमुख समय अगले हफ्ता समाप्त हो जाएगा। अधिकारियों ने मीडिया से बताया कि 26 जुलाई तक झारखंड में 47 फीसदी बारिश कम हुई है। इस स्थिति को लेकर किसान चिंतित हैं और उनका अनुमान है कि राज्य में लगातार तीसरी बार सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य में बारिश की कमी से चिंतित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 19 जुलाई को अधिकारियों को कृषि पर इसके प्रभाव पर एक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि सहायता के लिए इसे केंद्र के समक्ष रखा जा सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की आदर्श बुवाई अवधि एक जुलाई से 20 जुलाई या अधिकतम 30 जुलाई (स्थानों के अनुसार) है।

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अभी तक मात्र 19.77 फीसदी हिस्से में हुई है बुआई

राज्य कृषि विभाग की बुवाई रिपोर्ट के अनुसार इस साल 18 लाख हेक्टेयर की बुआई का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी 26 जुलाई तक सिर्फ 2.43 लाख हेक्टेयर में धान की फसल बोई गई है। मतलब कि कृषि योग्य भूमि का सिर्फ 13.53 फीसदी हिस्सा ही बोया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पलामू, लातेहार, चतरा और देवघर जिलों में धान की बुवाई शुरू ही नहीं हुई है। राज्य में धान के अलावा दूसरी ख़रीफ़ फसलों जैसे मक्का, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की स्थिति भी सही नहीं है। खरीफ फसलों की कुल बुवाई 26 जुलाई तक 28.27 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 5.59 लाख हेक्टेयर ही हो पाई है यानी कृषि योग्य भूमि का सिर्फ 19.77 फीसदी हिस्सा ही बोया गया है।

DSR विधि से करें बुआई

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU), रांची के अनुसंधान निदेशक पी के सिंह ने मीडिया से बताया की बारिश के रुझान बदल रहे हैं और साथ ही बुवाई का पैटर्न भी बदल रहा है। अगर हम पिछले पांच वर्षों के बारिश के रुझानों का अध्ययन करें, तो हम कह सकते हैं कि स्थिति अभी भी चिंताजनक नहीं है। हमें 8 से 10 दिन और इंतजार करना चाहिए। और सिंह ने किसानों को मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए चावल की सीधी बुवाई यानो DSR विधि से करने का सुझाव दिया।

राज्य के मौसम विभाग ने कहा

रांची मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी अभिषेक आनंद ने मीडिया से बात कर बताया की पिछले एक हफ्ते से झारखंड में अच्छी बारिश हो रही है और हमें उम्मीद है कि यह अगले सप्ताह भी जारी रहेगी। झारखंड में अगस्त और सितंबर में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है। कृषि विभाग के उप निदेशक मुकेश सिन्हा ने कहा, हमें किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए 15 अगस्त तक इंतजार करना होगा। यहां के किसान अगस्त के मध्य तक धान की बुवाई करते हैं।

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